SIP बंद करने वालों की संख्या क्यों बढ़ रही है रोजाना! जाने किस बात का डर?

SIP investment: म्यूचुअल फंड का सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) लंबी अवधि के निवेश के लिए काफी अच्छा माना जाता है। आर्थिक जगत की प्रभावशाली हस्तियां भी लंबी अवधि में इसके रिटर्न की मुरीद हैं। पिछले दो महीने यानी अप्रैल और मई से लगातार 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश SIP में आ रहा है। मई में यह बढ़कर 20,904 करोड़ रुपये हो गया।

लेकिन, इस दौरान SIP स्टॉपेज रेशियो यानी SIP बंद करने वालों की संख्या में रिकॉर्ड उछाल आया है। SIP स्टॉपेज रेशियो नए खुले SIP खातों की तुलना में बंद हुए खातों का प्रतिशत बताता है। मई में SIP स्टॉपेज रेशियो 88.4 फीसदी पर पहुंच गया, जो इसका नया रिकॉर्ड हाई है। इसका मतलब यह है कि अगर 100 लोगों ने नए SIP खाते खोले तो 88 लोगों ने उन्हें बंद कर दिया या उनकी SIP अवधि पूरी हो गई।

आइए जानते हैं कि SIP के जरिए निवेश में लगातार बढ़ोतरी और दमदार रिटर्न के बावजूद SIP खाते बंद करने वालों की संख्या क्यों बढ़ रही है। क्या लोग बाजार से जुड़े जोखिमों के कारण डर रहे हैं या फिर वे एसआईपी खाते के पैसे का इस्तेमाल किसी और काम में कर रहे हैं।

एसआईपी नियमों में बदलाव

पूंजी नियामक सेबी ने एसआईपी नियमों में कुछ बदलाव किए हैं। सेबी के सर्कुलर के अनुसार, अब अगर कोई निवेशक अपने एसआईपी की लगातार तीन किस्तें चूक जाता है, तो उसका एसआईपी रद्द माना जाएगा। पहले यह म्यूचुअल फंड पर निर्भर करता था कि वह निवेशक के एसआईपी खाते को कब रद्द घोषित करे। इसके कारण वे एसआईपी स्वतः ही रद्द मान लिए जाते थे, जिनमें पिछले तीन महीने से कोई निवेश नहीं हुआ था।

लोकसभा चुनाव की हलचल

लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही इक्विटी बाजार में बड़ी उथल-पुथल मच गई। खासकर, शुरुआती दौर में कम वोटिंग के बाद विदेशी निवेशकों ने जमकर बिकवाली शुरू कर दी। अस्थिरता के इस माहौल में म्यूचुअल फंड ने भी एसआईपी खोलने के अपने मार्केटिंग अभियान पर ज्यादा जोर नहीं दिया। वहीं, शेयर बाजार में उथल-पुथल के डर से कई निवेशकों ने अपने एसआईपी भुना भी लिए।

बजट की भी अहम भूमिका

नई केंद्र सरकार जुलाई में अपना पहला बजट पेश करेगी। इसमें कई नियमों और करों में बदलाव की संभावना है। ऐसे में कई लोग बजट से पहले अपनी लंबी अवधि की योजनाओं को लागू करना चाहते हैं, जैसे घर या कार खरीदना। शेयर बाजार की अस्थिरता ने भी उन्हें अपनी एसआईपी भुनाकर घर या कार खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही, कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने शेयर बाजार में गिरावट का फायदा उठाने के लिए अपनी एसआईपी भुनाकर निवेश करने का फैसला किया।

क्या एसआईपी रोकना सही है?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आप किसी गंभीर वित्तीय मजबूरी का सामना नहीं कर रहे हैं, आपको एसआईपी नहीं रोकना चाहिए। खासकर, बाजार में गिरावट से बिल्कुल भी घबराएं नहीं। इसके विपरीत, बाजार में गिरावट के दौरान एसआईपी जारी रखने से आपको लंबे समय में फायदा होता है.

क्योंकि गिरावट के दौरान शेयर कम कीमत पर मिलते हैं और आपसी खरीदारी बढ़ जाती है, जिसका आपको लंबे समय में फायदा होता है। इससे उन शेयरों की लागत औसत को कम करने में भी मदद मिलती है जो अधिक कीमत पर खरीदे गए थे।